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First Madrasah Where Quran Education Is Given On Tablets | Rehan Allahwala Visits Al Quran Academy

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Join Rehan Allahwala as he visits the Al Quran Academy, a revolutionary digital madrasah in Dhirkot, Azad Kashmir, where modern technology meets traditional Quranic education. Rehan, a passionate technology enthusiast, was amazed to see young students reading the Quran on smart…

Transcription

Hindi

आज हम अपने मोहसिन अल्ला वाला को यहां पर खुशामदीद कहते हैं ये अलकन अकेडमी रको तशरीफ लाए हैं हम उनका शुक्रिया भी अदा करते हैं इसका पूरा कंपलेक्स जो है इसका हम इनको विजिट करवाते हैं भाई का बेहतरीन निजाम है य नहीं तो अलग से खुशब आ जाती दूर से पता चल जा जी नहीं नहीं माशाल्ला बिस्तर न लाते हैं लेकिन मुझे अभी तक समझ में नहीं आया कि 400 में तीन वक्त का खाना और बोर्ड कौन सा यूज करते हैं मैट्रिक का मैट्रिक का बोर्ड है यही मीरपुर हमारा एक साल और उसमें हम फिफ्थ और सिक्सथ से उसको चार जीपीटी कैनवा वीडियो एडिटिंग और इंटरव्यू करना सिखाते हैं इंटरव्यू से मुराद ये है कि वो बच्चा मेरे साथ आपके साथ बैठेगा आधे घंटे वो बातें करेगा लेकिन वो ऑनलाइन करता है यानी कि वो जो जो ब सामने आदमी है वो यहां सामने नहीं होता जी दूर कहीं होता है मुझे सिर्फ ये बताएं कि ये असजा की ट्रेनिंग आप कैसे देते कि जैसे वो टैब पर आप काम ले रहे हैं वो हमारी यहां ये है ना रीड फाउंडेशन का यहीं से हम हायर करते हैं टी शाम के वक्त जब यहां से फार हो जाते हैं य आ हो जाता डेढ़ बजे पने तो वो खाना खाती है टीचर जा के तो यहीं से फिर उनकी क्लास शुरू हो जाती है मुफती मोसन और मुफ हसान मुझको कराची में बना के [संगीत] द हम आज कुरान अकेडमी धीर कोट आए हैं ये यहां के एडमिनिस्ट्रेटर है और इंचार्ज जी सर जी आज हम अपने मोहसिन आरफ अल्ला वाला को यहां पर खुशामदीद कहते हैं यह अलकन अकेडमी दीर कोर तशरीफ लाए हैं हम उनका शुक्रिया भी अदा करते हैं बच्चों के साथ एक एक्टिविटी की गई है उस परे भी हम इनके शुक्र गुजार हैं कि बच्चों को एक बड़ा अजीम मैसेज दिया गया है एक तो सफाई के हवाले से दूसरा हम इस कोरा क्रिकेट से हम रोजमर्रा की जिंदगी में अपनी आमदन को बढ़ाने के लिए हम किस तरह से मुख्तलिफ चीजें बना सकते हैं टाइज बना सकते हैं उसके लिए भी एक मैसेज और एक समझा गया हम इनका शुक्रिया अदा करते हैं इस वक्त हम इनको इससे पूरे जो है हमारा जो अलकन अकेडमी धीर कोट है इसका पूरा कंपलेक्स जो है इसका हम इनको विजिट करवाते हैं और साथ-साथ से हम आगे बढ़ते जाएंगे शुक्रिया आप अंदर आ [संगीत] ये मरकज हाल है मस्जिद का ये हमारे साथ ड फाउंडेशन रीड फाउंडेशन प्राइमरी स्कूल है ये अच्छा ये बहुत अच्छा स्कूल है यहां का एक वन ऑफ द बेस्ट आप बेटा वीडियो नहीं बनाना हम एक सी झांकी म कह सकते हैं य वहां प भी आप अगर आप विजिट करना चाहे तो बाद में इसका भी कर ले वो पर्दे का मसला होगा यहां पे हमारी बच्चियां है फीमेल टीचर्स है वो पढ़ाती हैं हमारे प्रिंसिपल हैं जो आपके साथ सुबह थे वकार भाई वो भी शायद इधर मौजूद होंगे [संगीत] यह मस्जिद कौन चलाता है यह मस्जिद यहां के जो हमारे मदरसे की है जो हमारे मल सा में टीम है सरपरस्ती और सिस्टम य जमात कर जमात सामी केर जी जी अ कौन सी क्लास तक के बच्चे ये फिथ तक के [संगीत] ब ये इनका बच्चों का डाइनिंग हल है यहां प बच्चे खाना खाते हैं यह साथ किचन है खाना भी आप देते हैं जी जी खाना भी यहां प ये जो ये जो बच्चे ये रिहायशी है ये तकरीबन 60 बच्चा है ये रिहायशी है ब्यूटीफुल अभी आप इसकी तालीम के हवाले से भी हम यतीम नहीं है सिर्फ यतीम नहीं है बल्कि वो भी नहीं है कि कोई जो स्कूल ना पढ़ सके आ ये ऐसा नहीं है ये स्कूल भी है हां स्कूल भी है मदरसा भी हैय उसकी पूरी ब्रीफिंग इंशाल्लाह हम आपको ऑफिस में चलके देंगे काम कैसे होता है यहां पे ठीक है ये साथ वाला हाल भी है खाने का क्या टाइम होता है आपके खाने का यहां पर बच्चे खाते हैं एक बजे खाना खाते हैं सही और डिनर नर शाम मगरिब के बाद उसके बाद फिर आजकल 5 बजे मगरिब होती है तो 5 बजे खिला देते हैं नहीं फरन नहीं खाते उसके बाद क्लास होती है कोई 6:3 और सात के दिन में यह दूसरा हाल है यहां पर बच्चों की क्लासेस भी होती है यहां पे बच्चे जो है ना यहां के बच्चे जितने स्कूलिंग भी इसी में स्कूलिंग भी इस में स्कूलिंग का अलग से टाइम है और मदरसे का हि भी करते और अरबी भी सिखाते जी सर [संगीत] यह नीचे बच्चों की रियाज का भी है य और नीचे भी हमारा एक हाल है बच्चे बैठते हैं य एडमन ऑफिस है टीचर कितने आपके पास हमारे पास छह टीचर है य ह य पर टीचिंग करते हैं पहले इर अर और बोर्ड कौन सा यूज करते है मैट्रिक का मैट्रिक का बोर्ड मीरपुर एजे के बोर्ड ये हमारी क्लास होती है इस तरह से इनकी सिटिंग अरेंजमेंट यही है बच्चों का तो ये बच्चों की आगे रिहा का है यह देखिए रिश का बच्चे एक एक बर्ड के तीन तीन बने हुए गिरते तो नहीं नहीं नहीं अभी हमने पीछे जगह और ले ली है ये जो पीछे ग्राउंड है ना ये जगह किसी की थी करोड़ परचेज की है तो एक करोड़ में कितनी जगह है एक कनाल एक कनाल को एक मरला है मेहमान आ जाए तो हमें आप रात को यही ठहरा देते चले व रिजेंसी भी उसकी भी मार्केटिंग ये इस तरह ऊपर भी दोनों कमरे हैं बच्चों केय भी रिश है बचों की मुती मोहसिन और मुफ्ती एहसान जी जी मुझको कराची में ये बना के दें भाई जी बिल्कुल ठीक है जी सर वसीम मुझे ये बना के दें जी सर ये तो दे नहीं रहे मुझे अपना मदरसा मैं क्या करूं ये आपका मदरसा है नहीं वो वो नाम रखने से थोड़ी होता है काम होना काम भी होगा इंशाल्लाह सफाई का बेहतरीन निजाम है यहां ये देख बच्चे साफ सुथ तो अल खुशबू आ जाती है दूर से पता चल जाता जी जी नहीं नहीं माशाल्लाह बिस्तर नए लाते हैं यहां से भी हम तो बच्चे फीस नहीं देते फीस देते हैं ब फीस देते अच्छा क्या फीस देते हैं बच्चे यहां पे इस वक्त जो है ना 44500 दे रहे हैं कुछ 4000 दे खाना पीना रि यूनिफॉर्म यूनिफॉर्म तो बच्चों का अपना होता है लेकिन बाकी जो इंटरनल यहां जरूरियत होती है वो सारी बच व कुछ फ्री भी हो हां कुछ एक दो बच्चे जो रफन है वो फ्री हैं या कुछ थोड़े माली लिहाज से जो कमजोर होते हैं तो क्योंकि अब बढ़ते हैं तो फिर इस पे तफसील डिस्कस करते हैं कि बच्चों की ट से शुरू करवाए 10000 में रेसिडेंशियल बना दे लेकिन मुझे अभी तक समझ में नहीं आया कि 4500 में तीन वक्त का खाना कैसे खिलाते हैं अभी आपसे ये शेयर [संगीत] करते यह जो देखिए कुरान सीख रहे हैं ना बच्चे यह भी एक बहुत मख सूस पैटर्न के ऊपर कर रहे हैं आप आए आप ये प्रिंसिपल ऑफ आप [संगीत] बैठ बिस्मिल्ला रहमान रहीम मतम आरफ अल्ला वाला साहब आपको आपकी सारी टीम जो यहां पर तशरीफ लाए हैं आपका शुक्रिया भी अदा करते हैं आपने आते ही एक बड़ी जबरदस्त एक्टिविटी करवाई जिससे एक बड़ा मैसेज पूरी बच्चों में भी गया और इस कम्युनिटी में भी गया तो यह जो हमारा अल कुरान अकेडमी है यह बेसिकली यहां पर दो तरह की तालीम दी जाती है एक तो हमारी रूटीन की जो दुनियावी तालीम है क्लास सिक्स से लेकर एट तक यहां पर पढ़ाया जाता है बच्चों को और इस तीन साल में बच्चों को हिस भी करवाया जाता है और यहां पर ये जो इस अकेडमी की मफत बात यह है कि इस एडमिशन के लिए तकरीबन हर साल 100 के लगभग बच्चे अप्लाई करते हैं या टेस्ट इंटरव्यू देते हैं उसकी बुनियाद पर एडमिशन दिया जाता है और सिर्फ 12 की क्लास ली जाती है बच्चों की तो ये जो 12 की क्लास है ये करैक्टर एजुकेशन के तान से यहां पर चलती है वह लोग इसको लुक आफ्टर भी करते हैं और उसकी बुनियादी वजह यह है कि यहां पर जो फिफ्थ पास बच्चा आता है एक तो उसका टेस्ट लिया जाता है रिटर्न टेस्ट और साथ-साथ इंटरव्यू भी लिया जाता है और बुनियादी तौर पे ये जो कुरान की तालीम दी जाती है कुरान हिस तो यहां पे गांव गांव महल्ले महल्ले में उलमा कराम कुरान की तालीम दे रहे हैं हिज भी करवा रहेंगे लेकिन ये वाहिद अधरा है पाकिस्तान और आजाद कश्मीर भर का आप कह सकते हैं कि ये जो बच्चा है न साल में क्रान हिस तो कर लेता है लेकिन साथ-साथ बच्चा क्रान अंडरस्टैंड भी करता है ये हिप्स विद अंडरस्टैंडिंग है और इसका यानी फेमल क्रान बच्चे को साथ-साथ आ जाता है और वो बच्चे को जो जो सिपरा वो हिप्स करते आगे बढ़ता जाता है साथ-साथ आप उससे उस बच्चे की उस उसका तर्जुमा उसकी ग्रामर और तमाम जो भी उसके अंदर रूल्स है वो बच्चा खुद बखत साथ-साथ करता रहता है और उसकी जो उलमा कराम है जो टीज करते हैं या पढ़ाते हैं बच्चों को उनकी ट्रेनिंग जो है वो करैक्टर एजुकेशन फाउंडेशन के जरिए की जाती है उनकी जो है रिक्रूटमेंट भी करैक्टर एजुकेशन वाले खुद करते हैं साथ-साथ जो इनकी सानवी तालीम है उस हवाले से यह यहां पे आजाद कश्मीर अगर बच्चे बहुत सारे तालीमी अदार हैं हमारा एक बड़ा नेटवर्क जो रीड फाउंडेशन तालीम के ऊपर खास तौर पर काम कर रहा है लेकिन यहां पर यह जो क्लास सिक्स से ऑनवर्ड बच्चों को पढ़ाया जाता है इन मजमीन में बच्चों के पास यानी बच्चों को वह आस्ता सा इस तरफ लाया जा रहा है कि वो बगैर बैग के पढ़ेंगे बच्चों की जो टीचिंग होती है वह टोटल हम इसके ऊपर मल्टीमीडिया के ऊपर होती है और बच्चों को प्रोजेक्ट्स सब्जेक्ट्स के बनाकर दिए जाते हैं जो करिकल होता है उसको फॉलो किया जाता है और उसके मुताबिक जो टेक्स्ट बुक होती है उसके जो लेसन वगैरह उठा के उनके ऊपर प्रोजेक्ट्स बनाए जाते हैं और प्रोग्रेस जो है बच्चों को मल्टीमीडिया के ज समझा जाते हैं फिर बच्चे उनको डिस्कस करते हैं आपस में उसकी प्रैक्टिकल करते हैं यहीं पर बैठे-बैठे और एक घंटे के अंदर रोजाना का जो उसका मतका सब्जेक्ट का लेसन होता है या सबक होता है जो भी होता है उसको पूरी तरह से उस एक घंटे के अंदर अंदर रिवाइज करके टीचर के सामने एक्सप्लेन करके तो वो वहां से फारिग हो जाते हैं कोई इसमें बच्चों के लिए होमवर्क नहीं होता है क्लास के अंदर ही बच्चे तैयार हो जाते हैं और हर एक मां के बाद ट्रैक्टर एजुकेशन की टीम जो कि सब्जेक्ट बेस आके बच्चों से उसका जायजा लेते हैं और फिर उनको मजीद जो है इंस्ट्रक्शन देते हैं मजीद टारगेट सेट करके चले जाते हैं तो इस तरह यानी इसमें पूरे इस जो हमारे पास टाइम होता है बच्चों का तकरीबन एक साल का या 10 माह का होता है एक क्लास के लिए तो उसके अंदर ही जो है ना बच्चों को उसमें तीन हिस्सों में तकसीम करके प्रोजेक्ट दिए जाते हैं और वह हर चार माह बाद उन प्रोजेक्ट का जो है इंटरनल एग्जाम लिया जाता है जो कि सीएफ के जेर तमाम होता है और उसको 10 माह के अंदर उसको कंप्लीट करके बच्चे को अगली क्लास में शिफ्ट कर दिया जाता है तो मजम तौर पे इस अधारे के लिए यहां की कम्युनिटी और यहां से बाहर से भी जो है ना लोग इस चीज के खवाहिश मंद होते हैं कि हमारे बच्चे को इस अकेडमी में एडमिशन मिले और बाकी अल्हम्दुलिल्लाह इसका एक बेहतरीन यानी यहां पे जो उलमा कराम जिनकी यहां पे मेहनत है जिन्होने काविश की तो उसको बहुत बेहतर अंदाज में बच्चों की खास तौर पे सफाई का खाने पीने का और दीगर जो जरूरियत होती है उनका खास ख्याल रखा जाता है खास तौर पर बच्चे यहां कहीं प्रॉब्लम का शिकार हो जाए कोई बच्चा बीमार हो जाए उसके लिए भी यहां पे ही उसके ट्रीटमेंट का भी इंतजाम किया जाता है और यहां से फिर हॉस्पिटलाइज करना हो जहां कहीं भी तो हर मामले में बच्चों के खास तौर पे फिर दूसरा सबसे अहम पहलू यह है कि यहां पे बच्चों को कोई पनिश नहीं किया जाता है आम स्कूलों में या मदरसों में एक है ना कि लोग पनिश किया जाता है बच्चों को लेकिन यहां पे ऐसा कतन नहीं है इसकी इजाजत भी नहीं है बल्कि बच्चे बहुत खुद भी इंटेलिजेंट होते हैं बड़े अच्छे होते हैं पढ़ने वाले होते हैं और साथ-साथ उलमा कराम को भी इस चीज से जो है ना इंस्ट्रक्ट किया जाता है कि बच्चों को किसी किस्म की पनिशमेंट से नहीं गजना है तो मुस्तकबिल में यानी हमारा यह जो प्लान है क्योंकि इसके लिए जमीन भी ले ली गई है और यहां पर अकेडमी की जो है हमने अकेडमी बनानी है एक बड़ी जिसमें बच्चों के लिए एक तो रिहाइश का इंतजाम अच्छे तरीके से हो जाए फिर क्लासरूम्स हो जाए अभी हम जो क्लास ले रहे हैं हम इन्हीं हाल के अंदर बच्चों की क्लास ले रहे हैं तो इंशा अल्लाह फ्यूचर में हमारे पास बच्चों के लिए क्लास में भी अवेलेबल होंगी और जो है बाकी जरूरियत भी उनकी बहुत अच्छे तरीके से फुलफिल होंगी साथ-साथ इसके जो आगे प्लान है करेक्टर एजुकेशन वाले भी इसको प्लान कर रहे हैं हम खुद इंतजाम यहां पर भी प्लान कर रही है कि हम पहले मरहले में इस क्लास को ये जो क्लास सिक्स ऑनवर्ड जा रही है इसको क्लास 10थ तक इस तरह ले जाएंगे और जो इस वक्त आजाद पाकिस्तान और आजाद कश्मीर भर में जो बोर्ड्स की पॉलिसीज आ रही है एसएल की बुनियाद पर बच्चों के इतना वैर फड के तर्ज के ऊपर उस तरफ लेकर जा रहे हैं और इंशा अल्लाह बच्चों को यहां से एफएससी तक लेकर जाएंगे और साथ-साथ एक तो बच्चा पहले न साल में कुरान हिफ लेगा विद अंडरस्टैंड उसके बाद उसके लिए पूरा एक कोर्स जो है डिजाइन किया जा रहा है बच्चे जो जब यहां से फार हो तो उनका चार साल चार से छ साल के उनके लग चुके हैं वह आलिम का भी जो बुनियादी कोर्सेस हैं वह भी कंप्लीट करके तो उनके लिए फिर आगे हम मुख्तलिफ यूनिवर्सिटीज में भी यहां से ही सजेस्ट किया जाएगा कि किस बच्चों को किस जगह पर भेजना है तो इंशाल्लाह यह एक प्लान है जो कि अगले पा साल में हम इंशाल्लाह इस प्लान के ऊपर पूरी तरह से हम इसको फुलफिल करेंगे चाहूंगा कि 4500 में आप खाना पीना ये एक सवाल एक तो ये है कि हमें एक तो कुछ स्पोर्ट टीचर्स की सैलरीज की माध्य में ट्रक्टर एजुकेशन की तरफ से भी है तीन टीचर्स उनके हैं पॉइंट किए हुए जो यहां पे काम कर रहे हैं बाकी हम मुखर हजरात तावून करते हैं हमारे ये भाई लोग सारे ही बैठे हैं इनके तावून से मुख्तलिफ मुखर हजरात से वैसे यहां पे जो इस वक्त हमारी जो कॉस्ट आ रही है तकरीबन एक माह के जो एक्सपेंस होते हैं वो 3 लाख के लगभग होते हैं टोटल टोटल 50 बच्चों के जी 50 बच्चों के कितने पैसे हुए 3 लाख के लगभग तो तकरीबन 6 7000 तीन टाइम का खाना उसम गोश्त कितनी दफा खिलाते है हफ्ते में गोश्त हफ्ते में एक से दो दफा खिला जो हमारे पास परमानेंट जो स्केल है उसमें तो एक दफा होता है यानी दो टाइम होता है एक दिन और शाम लेकिन बसा औकात फिर हमारे पास जबत जगहो से मुखर आजाद भी तान करते हैं तो बाज औकात दो दफा भी हो जाता है तो इस तरह मुख्तलिफ सब्जी भी होती है दाल भी होती है तो हम तो नहीं कर पाए अभी तक आपसे सीखना पड़ेगा कि कैसे इतने नहीं अल्लाह का शुक्र है कि बहुत अच्छे अंदाज से हो रहा है और यानी बेहतरीन है यानी जाहर है ये बच्चे जो हम उठाते हैं ना लोगों से तो ये एक तो बच्चे बहुत यानी आप कह सकते हैं अच्छे खाते पीते घरना सुब होते हैं फिर ये अच्छे पढ़ने वाले भी होते हैं फिर घर में आकर बच्चे लाडले भी होते हैं लेकिन यह वाद अकेडमी है यानी आप कह सकते हैं कि यहां पर यह बच्चा आके खुश हो जाता है यहां से यह बच्चे के अभी वापस कोई नहीं भागा है जो भी है हालांकि बड़ा मुश्किल होता है बच्चों के लिए कि एकदम से घर से उठकर क्लास फिफ्थ में बच्चा मैक्सिमम 9 साल का होता है तो वो वहां घर से मां की गोद से उठ के आ ग तो बिल्कुल अलग से सेपरेट रहना शुरू कर दे तो यह इस अकेडमी का कमाल है कि यहां पर बच्चे जो है बड़े खुश रहते हैं और इस वक्त तक तकरीबन यह हमारे आठ से नौ साल हो चुके हैं इसको चलते हुए और इस वत तकरीबन तकरीबन आप मैं तो शुरू से नहीं हू हम अदार के मौत कमेटी मेंबर में हम शुरू से ही है तो अभी जिम्मेदारी जमात ने लगाई है यहां मैनेजमेंट की भी तो यह है कि तकरीबन यहां से यानी दो 300 के लगभग हाफिज जो है ना इबत तकरीबन पहले चार पाच साल तो हमारी क्लास तो होती रही है जो है अकेडमी की लेकिन हिस जो है ना वो भी साथ था लेकिन यह जो ट्रेंड चेंज हुआ है पिछले तकरीबन चार तीन साल से तीन साल में फिर हिस की भी एक नई जो है इसकी तरह से इसको शुरू करवाया गया और फिर ये जो दूसरी एजुकेशन है उसको भी तो इसमें बहुत बड़ा फर्क पड़ा है तो अब जो है ना लोगों की खवाहिश है कि स्कूल के बजाय हमें इस तरह का कोई अधरा मिल जाए जिसमें एक तो बच्चे के ऊपर बैग का बोझ भी ना हो और वो बहुत अच्छे तरीके से मैं चूंकि इस रीड फाउंडेशन के साथ गुस्ता 24 साल मुंस लिक रहा हूं मुख्तलिफ जॉब प्रिंसिपल भी रहा हूं कॉलेजस में हाई स्कूल में और फिर डिपार्टमेंट में रीजनल रीजन की भी जिम्मेदारी रही है लेकिन यहां पर जो उसमें और इसमें फर्क है ना कि यहां पर बच्चा ये जो खास तौर पर इसकी जो तालीम का सिलसिला है इसको बहुत खुश होकर ले रहा है वहां प बच्चों को बड़ा टीचर बहुत दिन पूरा मेहनत करते हैं हालांकि हम यहां पर टोटल तीन घंटे यह काम करते हैं लेकिन उस तीन घंटों में ये कमाल है और हम सीएफ वालों के भी शुक्र शुक्र गुजार हैं कि उन्होंने एक अच्छा निजाम दिया कि बच्चे उन तीन घंटों में अपनी चीजों को बिल्कुल फुलफिल कर लेते हैं और खुशी खुशी उनके ऊपर कोई बोझ नहीं होता है और साथ-साथ वो हि भी कर रहे होते हैं और बाकी चीजें भी उनकी बहुत अच्छी अंदाज से होती है बेहतरीन है जी जबरदस्त है मैंने पहला मदरसा देखा है जी सर ये है ही पहला मदरसा के यहां पे 50 बच्चों से पूछा जाए कि खुद लाता है बच्चा खुद लाता है टैब है उसके अंदर उसको वीडियोस भी दी जाती है दोनों तरह एक तो ये हिस के मुताका भी वीडियोस है उसके जो ग्रामर उसने समझ नहीं है चीजें वो भी उसको रिवाइज उसी के ऊपर करता है कुरान को भी उसी के ऊपर रिवाइज करता है और फिर ये जो बाकी उसकी असरी उलूम की जो होती है चीजें वो भी सारी उसी के साथ उसके पास वीडियो शेयर हो जाती है वो उनको देखता रहता है इंटरनेट एक्सेस भी देते हैं इंटरनेट एक्सेस नहीं देते [संगीत] तो एक दिन घर में चीज देख लेते हैं तो बल आजकल चक है घर में भी यह अप्रोच है पहला मदरसा टब भी हर के पासस थोड़ा सा अपना स्कूल का ताफ करता हमारे स्कूल भी फिथ से शुरू है पहला बैच है जो हम फिथ और सिक्स का ले रहे हमारा एक साल पुराना स्कूल है और उसम हम फथ और सि से उसको चट जीपीटी कनवा वयो एडिटिंग और इंटरव्यू सिखाते इंटरव्यू से मुराद ये है कि वो बच्चा मेरे साथ आपके साथ बैठेगा आधे घंटे वो बातें करेगा लेकिन वो ऑनलाइन करता है यानी कि वो जो जो ब सामने आदमी है वो यहां सामने नहीं होता दूर कहीं होता है उसने एक साल में 250 इंटरव्यू करने होते हैं हर रोज एक इंटरव्यू करना होता है उसमें से 100 से 150 उसने उर्दू में करने होते हैं और 100 से 150 अंग्रेजी में करने होते तो जब वो अंग्रेज का इंटरव्यू करता है अंग्रेजी में बातें करता है तो एक तो उसके अंदर खुद एतमाद आ जाती है दूसरा वो ग्लोबल सिटीजन बनना शुरू हो जा बचपन से उसके दोस्त बनना शुरू हो जाते हैं ग्लोबल जब वह सातवी में आता है तो हम उसको एक दुनिया का बड़ा प्रॉब्लम देते हैं मिसाल के तौर पर एक बच्चे ने कहा गैस बना सकते तो उसको गैस का शर है तो हम उस बच्चे को कहेंगे कि आप बायो गैस वाले बन जाए और आपका काम सिर्फ यही होगा कि आप बायोगैस पढ़ेंगे आप मैथ्स नहीं पढ़ेंगे साइंस नहीं पढ़ेंगे इंग्लिश कुछ नहीं पढ़ेंगे सिर्फ बायोगैस पढ़ेंगे बायोगैस कैसे पढ़ते हैं के आप रोजाना बायोगैस के ऊपर एक वीडियो देखते हैं फिर अपनी वीडियो उसको समझाते हैं कि आपने कैसे बनाई और फिर इंटरनेट पर आप उसको लगा देते हैं उसके नतीजे में यह होता है कि कि वो उसकी फैन फॉलोइंग बनना शुरू हो जाती है वो एक लाइट हाउस बन जाता है इसकी तरफ सब मुंह करके देखते हैं कि इसके पास चले जाओ ये मसला सॉल्व कर देगा मिसाल के तौर पे आपके इलाके में यूसी का चेयरमैन है तो सब उसकी तरफ देखते हैं कि भाई जो भी प्रॉब्लम है उसके पास चले जाओ वो हल कर देगा तो इसी तरह से अगर किसी को बायोगैस का प्रॉब्लम है गैस का प्रॉब्लम है बच्चे की तरफ दे सिरफ पानी का मसला है कूड़े का मसला है फाइनेंशियल हालात का मसला है बीज आपने का य सेंटर बनाया उसका मसला है या या कोई काम है तो हम इस तरह से वाला सिस्टम इंट्रोड्यूस करते हैं और उसको फिर कहते हैं कि दो साला बा वाला पड़ेंगे उसके उसकी वजह से उसको सारी दुनिया के लोग मिलना शुरू हो जाते हैं जो उस मसले पर या उस काम करते हैं जैसे फॉर एग्जांपल भाई का कंस्ट्रक्शन का बिजनेस है तो अगर ये 250 दुनिया के बेस्ट कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालका को जानते हैं जी जी तो इनका खुद बखुदा नॉलेज ऊपर होगा या फस जाएंगे तो फोन करेंगे यार ये मेरा फस गया मैं क्या करूं नेटवर्क होगा ना तो उसके बाद हम उसका एक स्टार्टअप शुरू कराते हैं बिजनेस शुरू कराते हैं जिसको आप वो आगे जाके मैं ले रखता हूं जिसको वो आगे जाके हम उसके अंदर फंडिंग करवाते हैं और उसको एग्जिट करवाने की कोशिश करते हैं एग्जिट से मुराद ये कि वो बेच भी दे बेचने और बेचने के लिए हमारी कोशिश ये होती है कि कम से कम 30 करोड़ का बके यानी न मिलियन डॉलर का बके जो कि बिल्कुल बेयर मिनिमम प्राइस है तो ये हमारा आगे का प्लान है दो घंटे रोज का ये हमारा करिकुलम है एक्चुअली तो अगर आप अपने मदरसे में ऐड करना चाहे तो नचर हम भी आपको दे देंगे तो आप अपने मदरसे में इस सिस्टम को ड करवा सकते हैं अगर आप चाहे शूरा अगर इजाजत दे और इस तरीके से यहां पर यह हर बच्चे को एक एक वाला मिल जाएगा उनको एआई सिखाई जाएगी उनको ये ग्राफिक डिजाइनिंग सिखाई जाएगी वीडियो एडिटिंग सिखाई जाएगी इंटरव्यू करना सिखाए जाएंगे और उसके बाद वो करवाया करवाना करवाना जाएगा जाक वो एक ग्लोबल सिटीजन बन सके और जो आप चाहते हैं इस इलाके के लिए कि जी दीर कोट के अंदर सारी दुनिया से लोग आए तो उसी वक्त आएंगे जब लोग वहां के लोगों को जानते हो मैं य सिर्फ इसलिए आया हूं कि मैं यहां एक आदमी को जानता था जो यहां का था वो उसकी वजह से हम पुल कर जाते तो अभी हमने यह तकरीबन समझे कि एक साल हुआ है और हमारे यहां तकरीबन हर हफ्ते कोई नॉन पाकिस्तानी आता है स्कूल विजिट करता है और तीन चार लोग सिर्फ बच्चों की वजह से पाकिस्तान फ्लाई करके आए और स्कूल देखने के लिए ये कैसे मखलूक है ये बच्चे कैसे हैं कि रोज ये पटर पटर बोल रहे ऐसा कोई स्कूल हमने नहीं सुना है देखा है कहीं भी नहीं है जो ये इंटरनेशनली इस तरह से इंटरेक्ट करता हो एक नया सिस्टम हम इंट्रोड्यूस करने की कोशिश कर रहे हैं अगर आप मुनासिब समझे आपकी शूरा मुनासिब समझे तो यह आप कर सकते हैं उसका फायदा यह होता है कि वह बच्चा अर्ली एज में उसके ग्लोबल नेटवर्क होता है तो उसको काम मिलना शुरू हो जाता है मिसाल के तौर पर अगर किसी को ग्राफिक डिजाइनिंग आती है तो अगर मैं पाकिस्तान में रहता हूं तो मैं कहूंगा 00 ले लो लेकिन अगर मैं अमेरिका में रहता हूं तो कगा ड ले लो तो बन गए 00 00 बने 70 सेंट्स तो वो क्योंकि दोस्त है और डिजिटल सर्विस है कहीं भी बेच सकते हैं हम नॉर्मली जॉब चाहिए होती है या काम चाहिए होती है तो जानने वाले के पास जाते हैं यार इसके पास चले जाओ ये हमारा जानने वाले का जानने वाला है वो कर देगा लेकिन हमारे क्योंकि अमेरिका में यूरोप में पाकिस्तानी जानने वाले तो होते हैं वो खुद बेचारे टैक्सी वाले होते हैं तो वो भी फाइनेंशली कमजोर होते हैं तो हम इसलिए इनको नॉन पाकिस्तानी से इंटरेक्शन ज्यादा कराते जाके आप एक ग्लोबल सिटीजन बने दुनिया का 97 पर पाकिस्तान से बाहर रहता है उनसे इंटरेक्शन करें ये हमारा माशाल्लाह आपका तो बहुत जबरदस्त आईडी है हम जाहर है इस उस टाइम में जो हम बच्चा लेते हैं तीन साल के लिए पेरेंट्स के लिए उसकी 8 उलूम भी तीन क्लास करवानी होती है साथ साथ इस अंडरस्टैंड के इसके अंदर हम देखते हैं अगर किस तरह की स्पेस बन सकती है कि कोई एक एस्पेक्ट ही आपके साथ अटैच हो जाए और यह बच्चे उसके ऊपर चले जाए तो इंशाल्लाह हम इस पर भी बैठे हमा जिम्मे दरा बैठेंगे और यहां की जो इंतजाम और साथ साथ हमारे टीचर्स हैं तो सारे बैठ क्या मूस कोई टाइम निकाल सकते हैं और उसके लिए तो इंशाल्लाह आपके साथ हमारा राबता रहेगा और इसको आपके इस आईडिया को भी इंशाल्लाह हम ीर कोर्ट में आईटी कॉलेज के साथ-साथ इसको भी अटैच करने की कोशिश करेंगे और फ्यूचर में बच्चों का यहां पर असल में यह है कि हमारे पास जगह बहुत कम है उस तरह की वरना यहां यानी स्कूल से ज्यादा लोग बच्चे हमारे पास लाने के लिए तैयार है यानी अभी साल शुरू नहीं होता नया साल उससे चार छ माह पहले राते शुरू करने से कि मेरे बच्चे को ले ले तो हम एक ही बात करते हैं कि आप अपने बच्चे को टेस्ट इट के लिए तैयार करें उन 12 बच्चों में अगर आपका बच्चा आ जाता है तो हम उसको ले लेंगे वरना हम आपसे मजरत करेंगे या यहां पर ऐसा भी हुआ है कि यहां की बड़े-बड़े जिम्मेदार से जमात के जिम्मेदार कि हमारे अमीर साहब जो जमात के साबिक अमीर है उनसे भीना सिफारिश करवाई गई कि हमारे बच्चे को या जाए लेकिन य अकेडमी की पॉलिसी के मुताबिक किसी ऐसे बच्चे को नहीं लिया गया कि जो उन 12 बच्चों में शामिल ना हो तो इसकी वजह से इस अकेडमी का एक नाम भी है लोग इमाद भी करते हैं इंशाल्लाह इन फ्यूचर जो है आपकी सजेशन के ऊपर जरा इसका फ्यूचर बच्चे का इसी के साथ मसली है तो हम जरूर कोशिश करेंगे किसी ना किसी तरह की अटैचमेंट हो जाए बहुत बहुत शुक्रिया जो वाला वाली टेक्नोलॉजी कांसेप्ट है जी सच्ची बात है एक चीज तो हम इस अकेडमी के हवाले से यानी जो फ्यूचर के हवाले से डायरेक्टर अकेडमी राजा आश साहब ने बताई चीजें कि फ्यूचर के हवाले से हम एफएससी तक तो यहां प्लान कर रहे हैं लेकिन उसके बाद हम उनको जो इकोनॉमिक्स में जाएगा तो इकोनॉमिक्स का स्पेशलिस्ट और उसको जांग दुनिया भर कार चाहिए या ये डिस्कशन में था हमारा इस वाला वाले कांसेप्ट ने हमारा वो कंफन या रिफाइन कर दिया हमारे आईडिया को कि य यानी दुनिया में तो और दूसरी चीज चीज ये भी रिफाइन हो गई है हमारी कि इसको जरा आगाज से शुरू करवा लिया जाए जो वाला वाला या जो स्पेशलाइजेशन है उसकी जिंदगी की वो सिक्सथ क्लास से फिफ्थ से ही शुरू हो जाए ना कि एफएससी के बाद शुरू हो जी जी लेकिन इसको थोड़ा सा मैं तो इस इसमें एक जो पूरी कमेटी और एक सिस्टम है इंशाल्लाह उसमें लाके तो कम से कम हम इन फ्यूचर ये बिल्कुल तय करते हैं आज और य कैद भी करते हैं कि ये वाला वाली क्लास एक एक क्लास पूरी बाकी तो बच्चों के वालदैन भी एक सेंसिटिव होते हैं और और इससे इस उस खौफ से लोग नहीं निकल रहे जो एक डिग्री का और वो एक वो यती तालीम का है लेकिन एक क्लास हम इंशाल्लाह एक क्लासेस की और एक आईटी सेंटर जो होगा वो वाला वाली क्लास होगी कि वो लोग दुनिया के लीडर्स हो अपने अपने फील्ड में और एक चीज जो आप सलूशन जो हमने निकाला है वो आप कर सकते हैं वो ये कि आप एफएससी डायरेक्ट अमेरिका से इनको करवा सकते हैं यानी आप पाकिस्तान को भी स्किप कर दें एजे के को भी स्किप करते और 12वीं का एग्जाम डायरेक्टली यहां से आप दिलवा सकते हैं सिर्फ चार एग्जाम होते हैं मैथ्स इंग्लिश साइंस और सोशल स्टडीज ये चार एग्जाम आप पास करते हैं ये सामने बैठा हुआ है एक डिग्री होल्ड 12वीं का एग्जाम आप पास कर लेते हैं इसको जीई डी कहते हैं जनरल एजुकेशन डिप्लोमा ये इक्विवेलेंट है इंटर के एफएससी के तो आपको किसी बोर्ड से रजिस्ट्रेशन कराने की किसी बोर्ड के बातें मानने की जरूरत खत्म हो जाती है अब आप 12वीं तक अपनी मर्जी की पढ़ाई उसको पढ़ा सकते हैं और सिर्फ चार एग्जाम आपने पास कराने वो भी अमेरिका से इंटरनेट प बैठ के पाकिस्तान को डायरेक्ट आप स्किप करेंगे डायरेक्ट अमेरिका की डिग्री आपका बच्चा दे रहा हो इतना रेवोल्यूशन क्रिएट कर देगा कि आपको सारी जो कैद है ये कैद है बा मशक्कत जो हमारे ऊपर लगाई हुई है मैट्रिक की इंटर की उससे आपकी सीधी सीधी जाच छड़ जाएगी अगर आप ये इंप्लीमेंट कर ले रीड फाउंडेशन में भी एक एक दरा जीडी वाला बना ए लेवल ओ लेवल होता है ना इसी तरह जीडी का भी है इस्लामाबाद में एक टीचर भी मौजूद है जीडी का जो सिर्फ जीडी पास कराता है वो भी मैं आपको दे देता हूं तो उसमें लेकिन इतना आसान है कि साथ गए थे उन्होंने दो हफ्ते खुद ट्रेनिंग करी ऑनलाइन और खुद ही एग्जाम दिया खुद ही पास हो गया घर पे सर्टिफिकेट आ गया अब इसत बखेड़ा बनाने की जरूरत ही नहीं है जो हमने इस वक्त इंटर और मेट्रिक को हवा बनाया यही मसला है लोगों के जनों में ये चीज ये आप अगर करना चाहे तो ये आप कर सकते हैं सात बजे से हम इसकी कंसल्टेंसी भी ले लेंगे और राबता भी रखेंगे जजक जी इनका सवाल जी अलाम वालेकुम ला सबसे पहले तह दिल से आपका शुक्र गुजार कि आपने वो बच्चे जो अल्लाह के दीन को सीख रहे हैं जी जी उनको आपने क्योंकि मैं एक आलिम मुफ्ती हूं तो मैं जानता हूं कि ये काम जो आप कर रहे हैं बहुत ही खूबसूरत अंदाज में कर रहे बहुत एसन तरीके से कर रहे हैं अल्लाह आपकी काविश को पूरा करें अच्छा दूसरा मेरा सवाल है जो जैसे अभी आप उलमा कराम की बात कर रहे थे असजा की बात कर रहे थे मुझे सिर्फ ये बताएं कि ये असजा की ट्रेनिंग आप कैसे देते हैं कि जैसे वो टैब पर आप काम ले रहे हैं या आप उनकी कुरकुम इसमें सॉरी एक मैं बताना भूल गया कि ये जो असरी उलूम की टीचर्स हम अलग लेते हैं अच्छा वो हमारी यहां ये है ना रीड फाउंडेशन का यहीं से हम हायर करते हैं टीचर शाम के वक्त जब यहां से फार हो जाते हैं 2 बजे ये आफ हो जाता है 1:30 बजे 2 बजे वो 1:30 बजे पने दो वो खाना खाती हैं टीचर्स आके तो यहीं से फिर उनकी क्लासें शुरू हो जाती है अच्छा तो उनकी ट्रेनिंग का जो एहतमाम है चकि रीड फाउंडेशन में ऑलरेडी वो ट्रेंड होती है बहुत सारे उनके कोर्सेस चल रहे होते हैं लेकिन खास तौर पे सीएफ उनको अलग से ट्रेनिंग करवाती है ठीक हो तो वो फिर उसका बैकअप भी लेते हैं उसको उनसे फीडबैक भी लेते हैं रमा आके उनकी चीज चेक भी करते हैं सारी चीजें आप कैसे चीजें पढ़ा रहे हैं कैसे समझा रहे हैं बाकायदा बच्चों से भी वो टेस्ट इंटरव्यू लेते हैं क्लासेस में बैठते हैं तो वो पूरा एक उनका स्केल होता है जिससे यह काम हमारे लिए काफी आसान हो रहा है ठीक हो बस मेरा यही सवाल था आपसे जकला बाकी जो हमारे कारी साहिबान है उनके लिए भी जाहर है ये जो आसान नहीं है अंडरस्टैंड कन वि अंडरस्टैंड इसके लिए भी खासी ट्रेनिंग जरूरत है तो वो ट्रेनिंग भी उन उलमा कराम की हमारे कारी साहिबान की वो भी सीएफ वाले खुद करवाते हैं इनको ट्रेनिंग करवाते हैं और फिर दूसरा यह होता है कि इसको इसके आगाज के लिए जब बच्चा नया आता है तो पहले तीन माह उसको फेमल कुरान के हवाले से जो उसकी बेसिक्स होती है उसकी ग्रामर होती है तीन बार बच्चे को हिस के ऊपर नहीं ले जाते हैं बल्कि उसका एक अलग से कोर्स होता है जिसके पांच लेवल होते हैं अंडरस्टैंड क्राउन कोर्स करने के तो वो पांच लेवल बच्चे के कंप्लीट हो होते हैं उसमें फिर बच्चा इम्तहान देता है वो उसमें पास होता है फिर जाके उसको बच्चे को हिस में डालते हैं कि अब यहां से ये शुरू करेगा तो अभी ये जो हमारी क्लास सिक्स है तो ये इससे मेरा से गुजर के अभी बच्चे छह छह जो है सि पारे हि कर चुके हैं अंडरस्टैंडिंग के साथ ठीक हो गया तो अल्लाह का शुक्र है कि जदा कर बहुत अच्छा जा रहा है