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"Rehan School Without Teachers?" | Houston Meetup | Ep - 137 | #rehanallahwala

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"Rehan School Without Teachers?" | Houston Meetup | Ep - 137 | #rehanallahwala --- In this powerful episode "Ep. 137", we bring you an eye-opening conversation between "Rehan Allahwala" and "Kamran Alam" during their meetup in "Houston, USA". The topic that sparked curiosi…

Transcription

Hindi

इन्होंने भी 12 13 साल की उम्र से कंप्यूटर प्रोग्रामिंग वगैरह सीखी पाकिस्तान में बड़ी मुश्किल से और फिर अमेरिका में आ गए और कंप्यूटर साइंस करी और फिर सैप के एक्सपर्ट हैं और अब ये सैप की कंसल्टिंग कंपनी हस्टन में चलाते हैं और ये बता रहे थे कि मैं आपका कस्टमर कोई 27 साल पहले था। पाकिस्तान के अंदर हमारे यहां सबसे बड़ी प्रॉब्लम जो तालीम ना होने की वजह से होती है वो होती है शाइननेस और उस शाइननेस के साथ कुछ बुरी चीजें भी अच्छी चीजें भी हैं क्योंकि बुरी चीजें ये है कि जहां आपको बोलना चाहिए आप बोलते नहीं है और जहां ना ही बोलना चाहिए वहां आप हट जाते हैं तो फिर उसके साथ फिर नेगेटिव चीजें भी आती है तो इससे क्या होगा बच्चे सीखेंगे हमारे स्कूल में टीचर्स है ही नहीं एवरीथिंग इज डन बाय द स्टूडेंट्स हमारे पास फैसिलिटेटर्स हैं और प्रिंसिपल से लेके नीचे तक हर काम स्टूडेंट ने खुद करना है करना है तो हम स्टूडेंट को ट्रेन करते हैं और फिर स्टूडेंट सारा कुछ करता क्योंकि टीचर की ट्रेनिंग सबसे हल्की है और जो स्टूडेंट ट्रेनिंग है वो सबसे भारी है। अस्सलाम वालेकुम एवरीवन। आज मेरे साथ कामरान भाई हैं और ये अमेरिका में 1991 से रहते हैं और इन्होंने भी 12 13 की साल की उम्र से कंप्यूटर प्रोग्रामिंग वगैरह सीखी पाकिस्तान में बड़ी मुश्किल से और फिर अमेरिका में आ गए और कंप्यूटर साइंस करी और फिर सैप के एक्सपर्ट हैं और अब ये सैप की कंसल्टिंग कंपनी हस्टन में चलाते हैं और ये बता रहे थे कि मैं आपका कस्टमर कोई 27 साल पहले था तो मुझे हैरानी हुई कि अच्छा यह मुझे मुझे उस जमाने से फॉलो कर रहे हैं और जानते भी हैं। कह रहे बात भी हुई है। मैं माज़त चाहता हूं भाई मैं भूल गया हूं। अमंग मेनी अमंग सॉरी। तो जैसा कि आपको मालूम है और आप इंटरेस्ट भी लेते हैं स्कूल में तो मैं चाहूंगा कि आप उससे रिलेटेड सवाल कर लें और मैं थोड़ा सा उसका ओवरव्यू दे देता हूं। फिर आपको जो ज़हन में सवाल हो वो आप कर लीजिएगा। एंड फिर नेक्स्ट वीडियो में हम आपके जो वहां पे आप बंदे रखना चाहते हैं उसप बात कर लेंगे। तो पाकिस्तान में जो मसाइल हैं उनमें एक मसला एजुकेशन का है और जो प्रोडक्शन जो इंसान हम पैदा करते हैं जो कि दिन के $2,000 साल के 7 मिलियन है जो कि 240 मिलियन हम प्रोड्यूस कर चुके हैं। उनका जो पर कैपिटा है वो $000 साल है। उस क्वालिटी का बंदा हम प्रोड्यूस नहीं करते जो आपकी क्वालिटी में आके वो $1 लाख प्लस कमा सके। बल्कि $000 आपसे 99 गुना कम वो कमाता है। और उसके अंदर बहुत सारे रीज़ंस हैं। अ आज भी 27 मिलियन बच्चे स्कूल नहीं जाते और 160 मिलियन अपना नाम नहीं लिख सकते किसी भी जबान में। ये गवर्नमेंट के नंबर्स हैं। तो अब एक 1100 प्राइवेट स्कूल है जो ऑन एवरेज 5 पर मंथ चार्ज करते हैं। पाकिस्तान की सबसे बड़ी दुनिया की सबसे बड़ी जो नॉट फॉर प्रॉफिट स्कूल ऑर्गेनाइजेशन है उसका नाम है द सिटीजन फाउंडेशन। 2000 स्कूल हैं। 1.6 मिलियन स्टूडेंट्स हैं। लेकिन 27 मिलियन फिर भी आउट ऑफ स्कूल हैं। वो 25 साल लगा के उन्होंने 1.6 मिलियन तक वो पहुंचे। तो देयर इज़ समथिंग व्हिच वी नीड टू फिक्स। प्रॉब्लम नंबर वन। प्रॉब्लम नंबर टू के जब मुझे अपने बच्चों के लिए स्कूल चाहिए था तो मैं नहीं चाहता था कि मेरे बच्चे छोटा सोचे। मैं चाहता था कि मेरे बच्चे बड़ा सोचे और दूसरों के बच्चे भी बड़ा सोचे। तो जो बड़ा सोचता है उसको बड़ा लीडर कहते हैं। जो छोटा सोचता है वो छोटा लीडर होता है। लीडर तो हम सब हैं। कोई अपने घर का लीडर होता है। कोई अपने मोहल्ले का होता है। कोई अपने शहर का होता है। कोई अपने मुल्क का होता है। कोई दुनिया का होता है। तो जो बड़े लीडर्स हैं जिस तरह से एडिसन है, टेस्ला है, ईॉन मस्क है, स्टीव जॉब है, बिल गेट्स है। इनको हम बड़ा लीडर इसलिए कहते हैं क्योंकि बड़े प्रॉब्लम्स को सॉल्व करते हैं। तो हम मैं एक ऐसा स्कूल बनाना चाहता हूं जो कि बाय डिज़ बड़ा लीडर प्रोड्यूस करें। बाय एक्सीडेंट ना करें। क्योंकि हम देखते हैं कि बाय एक्सीडेंट कोई बिल गेट निकल आता है, कोई बिल गेट कोई एडिसन निकल आता है और फिर हम शायर भी यह कहता है कि हजारों साद नरगिस जो है अपनी रोती रहती है। पता नहीं क्यों रोती रहती है। तो उसको ठीक करने के लिए सेकंड हमारा गोल ये है कि हम ऐसा स्कूल बनाएं जहां पर हाई स्कूल से पहले बच्चा कम से कम 10 लाख लोगों को इंपैक्ट दे चुका हो। कम से कम 1 मिलियन यूएस डॉलर कमा चुका हो और कम से कम एक गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दिलवा चुका हो उसके लिए ट्रेडिशनल एजुकेशन तो नहीं चाहिए उसके लिए कुछ और इग्रेडिएंट्स चाहिए वो इंग्रेडिएंट्स की हम तलाश में हैं और सर्च कर रहे हैं और जैसे-जैसे मिलते जा रहे हैं वैसेवैसे हम उसको शामिल करते जा रहे हैं और जैसे-जैसे हमें पता चलता जाएगा हम उसमें ऐड कर देंगे। वी रियली डोंट नो कि वो कैसे होगा। राइट। जो पहला प्रॉब्लम था कि इतने सारे बच्चे स्कूल नहीं जाते और बच्चे कम बच्चे जो हैं वो स्कूल कम है और बच्चे ज्यादा हैं। और स्कूल होने के बावजूद भी वालदैन नहीं भेजते। तो उसके लिए हमने ये किया है कि हम छठी क्लास में बच्चे को $100 पर मंथ कमाने पे ले जाते हैं। सातवीं में $200 और आठवीं में $500 महीने पे ले जाते हैं। ये हमारा चार साल का एक पैकेज है शुरू का। और उस पैसों में से आधे-आधे हम आधे स्कूल के आधे बच्चे के बाप के। तो अब क्या होगा कि बच्चा स्कूल आने के पैसे देने के बजाय 14,000 घर ले जा रहा है। सातवीं में वो 28,000 घर ले जा रहा है और आठवीं में $50 महीना तकरीबन बहुत 70800 घर लेके जा रहा है। वो कहेगा करेगा कैसे कि हम उसको फ्रीलांसिंग भी सिखा रहे हैं। हम उसको इंटर्नशिप्स भी सिखा रहे हैं। हम उसको बाहर के लोगों से कनेक्ट करा रहे हैं। जैसे आपका बेटा अमेरिका में अगर कहीं जाके इंटर्नशिप करेगा तो वो डॉलर में लेके जाएगा ना। रुपया तो नहीं देगा कोई उसको। तो कम से कम मरे से मरे भी 4500 देगा। हां बेटा चलो तीन महीने के बाद ये 5000 तो ले जाना शुरू कर दो। तो वही कांसेप्ट इन्हीं बच्चों से कराना है कि 3 घंटे वो काम करेंगे पहले शिव फ्री में। फिर इस लायक होंगे कि वो आप जैसों के साथ वो इंटर्नशिप कर सकें और उनके पैसे दे सके। ये है जी और ये ओपन सोर्स मॉडल है व्हिच मींस कि कोई भी कॉपी कर ले हमें बहुत खुशी होगी क्योंकि मैं अकेला तो पूरे मुल्क को नहीं पढ़ा सकता। बिल्कुल। मेरा टारगेट है कि मैं सिस्टम बनाऊं। सिस्टम को फ्ललेस करूं और या लेस फ्लॉस वाला करो और अवेलेबल कर दूं ताकि और लोग इसको कॉपी करके स्प्रेड आउट कर सके हम क्योंकि आपके स्कूल के बारे में मैं थोड़ा सा पहले से जानता हूं। ऑब्वियसली आपको Lindin पे फॉलो किया मैंने और थोड़े से कुछ सवालात हैं मेरे जिनमें से खासकर मैंने आपसे मेरे ख्याल से आपसे मुलाकात होते ही सबसे पहला सवाल मैंने कहा था कि बच्चे की एवरेज एज क्या है आपके स्टूडेंट्स वैसे? तो क्या है आपके पास? एवरेज एज तो 13 साल। 13 साल। जो हम लेते हैं हमारा आइडियल एज जो है वो न इयर्स है। ठीक है? तो उनकी पांचवी में लेते हैं। बिल्कुल पांचवी में लेते हैं। आपकी ग्रूमिंग कर रहे हैं 13 साल एवरेज है आपके पास। तो बाय द टाइम दे एक्चुअली गेट टू द पॉइंट जहां वो कमाना शुरू करते हैं वहां पर क्या एज है? एप्रोक्स साल। 9 साल। तो अगर आप इस तरह उनको बाहर उनके टैलेंट को कैश इन कर रहे हैं उनके लिए भी। ठीक है ना? इंटरनेशनल लेबर लॉस की कोई प्रॉब्लम्स तो लेबर नहीं करा रहे ना हम तो इंटर्नशिप करा रहे हैं। इंटर्नशिप करा रहे हैं। बिल्कुल ठीक है। एक छोटा आपके साथ है। सीख रहा है आपसे। चल ठीक है। क्योंकि अमूमन यही होता है कि आपको पता है कि वेस्टर्न मुालिक के अंदर लेबर लॉस है जो प्रोटेक्ट करना बहुत जरूरी होते हैं। तो इसके अंदर सीखना और इंटर्न्स हैविंग पेड इंटर्न्स एस वेल आल्सो वैरी गुड। लेकिन ये कि आई थिंक बाय टाइम एटलीस्ट दे हैव टू बी 16 और सोफ दे एक्चुअली स्टार्ट रियली मेकिंग गुड मनी फॉर देमसेल्व्स एंड ऑल दैट। अच्छी बात जो मुझे पसंद आई इस मॉडल की वो ये है कि वक्त जिस तरह निकल रहा है इस दुनिया में हमारे पास वक्त नहीं है कि हम 12 साल वेट करें बच्चे की पढ़ाई खत्म होने का दैट्स बेसिक हाई स्कूल और आपको भी पता है कि आजकल बैचलर्स भी एक बेसिक पढ़ाई हो गई है। जो हाई स्कूल जिस जमाने में 12वीं हमारे लिए था वो आज ऑलमोस्ट 16 16 साल हो गए हैं एजुकेशन के तो मिनिमम बेयर मिनिमम एजुकेशन है स्टैंड वर्ल्ड स्टैंडर्ड पे तो और आजकल बहुत सारे एम्प्लाइज जो हैं वो तो डिग्री मांग भी नहीं रहे कह रहे हैं कि इक्विवेलेंट एक्सपीरियंस है कि नहीं है ये बताओ तो मेरा अपना ख्याल ये है कि आई थिंक दिस इज़ अ वै गुड कासेप्ट क्योंकि इसके आप दो काम कर रहे हैं। एक तो आप उनको हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस दे रहे हैं। एक्सलरेटेड लर्निंग है थोड़ी क्योंकि वक्त कम है और मुकाबला थोड़ा सख्त है और डेफिनेटली इससे पावर्टी भी जो है हमारे मुल्क में जो है जो है उसको आप थोड़ा सा एड्रेस कर रहे हैं इससे इवेंचुअली द लॉन्ग लॉन्ग द लॉन्ग रन आई थिंक पावर्टी एड्रेस होगी इससे और एक चीज जो हम सॉल्व करना चाहते थे वो मैं भूल गया बताना मैं बताऊं वो ये के इतने साल हो गए लेकिन हमें कोई अभी तक हमने बात नहीं बिजली गटर की प्रॉब्लम ठीक करी बिल्कुल तो और कोई करता हुआ नजर भी नहीं आता तो हम अपने बच्चों को 100 प्रॉब्लम की लिस्ट में से लिस्ट देते हैं कि बेटा आप इनमें से एक सेलेक्ट कर लें और यही पढ़ेंगे आप। बिल्कुल। छठी में, सातवीं में, आठवीं में कैसे पढ़ेंगे? फॉर एग्जांपल बच्चा पानी वाला है तो रोज एक टेक टॉक देखेगा पानी की। बिल्कुल। उस टैक टॉक को समझने के बाद दोबारा बनाएगा अंग्रेजी और उर्दू में। फिर उसके बाद जिसने ओरिजिनल टैक टॉक दी है उसको टैग करेगा। फिर उससे रिक्वेस्ट करेगा कि मैं आपके साथ पॉडकास्ट कर सकता हूं। तो उसका जो नेटवर्क है उसकी जो शाइनेस है वो खत्म हो जाएगी। उसका नेटवर्क चेंज होना शुरू हो जाएगा और वो चाइल्ड प्रोडजी के तौर पर उभरना शुरू हो जाएगा क्योंकि वो बचपन से ही उसकी फॉलोइंग आने लगी। यह है कौन 12 साल का बच्चा पानी द लेवल ऑफ कॉन्फिडेंस यू आर हेल्पिंग देम गेन इन सच अ स्मॉल स्माल अमाउंट ऑफ़ टाइम। आई थिंक ये बहुत अच्छी बात है। आई थिंक दिस इज़ वै गुड बिकॉज़ आई थिंक पाकिस्तान के अंदर हमारे यहां सबसे बड़ी प्रॉब्लम जो तालीम ना होने की वजह से होती है वो होती है शाइनेस ऑफ स्पीकिंग आउट। राइट? और उस शाइनिस के साथ कुछ बुरी चीजें भी अच्छी चीजें भी हैं क्योंकि बुरी चीजें ये है कि जहां आपको बोलना चाहिए आप बोलते नहीं है और जहां ना ही बोलना चाहिए वहां आप हट जाते हैं तो फिर उसके साथ फिर नेगेटिव चीजें भी आती है तो इससे क्या होगा बच्चे सीखेंगे कि हाउ डू यू एक्चुअली टॉक टू पीपल हाउ डू यू सॉल्व प्रॉब्लम्स एंड व्हेन यू कैन सॉल्व प्रॉब्लम्स हाउ डू यू फाइंड पीपल हु कैन हेल्प यू सॉल्व प्रॉब्लम्स नंबर वन चीज ये है क्योंकि जिन प्रॉब्लम्स की आप बात कर रहे हैं दुनिया में पिछले पता नहीं कितने हजारों साल से ये सॉल्व हो चुकी है और अगर हम सॉल्व नहीं कर सकते तो वी गो टू पीपल हस्टन में 2017 में सैलाब आया। सैलाब आते रहते हैं यहां पर। लेकिन कुछ ऐसा सैलाब आया कि यह भी हिल गए थे। फौरन गए। इन्होंने हॉलैंड में लोगों से बात की कि भाई आप तो सैलाब से पिछले हजारों सालों से डील करते हुए आए हैं। कैसे? ये कह सकते हैं कि यार हम तो ये सिर्फ ह्यूस्टन की इकॉनमी जो है वो नेदरलैंड से बड़ी है। ठीक है ना? सिर्फ एक शहर की। लेकिन इनके पास शाइनेस नहीं थी कि वहां जाएं। उन लोगों से बात करें। उनको लेकर आए। शहर दिखाएं। अपनी टोपोग्राफी दिखाएं। दिखाएं कि हमारे यहां रेंस कैसी होती है, क्या नहीं होती। आपको मैं एडवाइस करें। एडवाइस मानना ना मानना हमारा काम है। लेकिन एटलीस्ट दे वर बोल्ड इनफ टू गो आउट देयर। तो ये हमारे यहां सीखना बड़ा जरूरी है। खासकर पाकिस्तान या हमारे कल्चर के अंदर जो सबसे बड़ी प्रॉब्लम है ना चाहे वो पाकिस्तान हो या इंडिया हो। इंडिया के अंदर भी यही है। सेम चीजें हैं के हमारे यहां अंदर कॉन्फिडेंस होना चाहिए टू आस्क। गलती करने से घबराना भी चाहिए। गलती आई थिंक मिस्टेक्स मैं कहता हूं कि आई थिंक आई एम अ आई एम अ क्यूमुलेशन ऑफ़ मिस्टेक्स आई हैव मेड प्रीटी मच। एंड लर्न फॉर देम टेक्निकली। कोई सवाल हो तो बताएं। तो आपके इस स्कूल के अंदर आपसे मेरी बात हो रही थी। इससे पहले भी आपने बताया कि बच्चे अपना लैपटॉप और सेलफोन खुद लेके आना जरूरी है। बिकॉज़ दीज़ आर द बेसिक मोड्स ऑफ़ कम्युनिकेशन। नॉट जस्ट कम्युनिकेशन बट कंप्यूटिंग एंड एवरीथिंग एल्स रिसर्च एवरीथिंग एल्स दे डू और लर्न इन स्कूल। तो आपका स्कूल इनको प्रोवाइड नहीं करता है। तो बच्चे जो अफोर्ड नहीं कर सकते हैं तो उनके लिए क्या होता है? उनके लिए एडमिशन उनके एडमिशन नहीं होता। हमारा टारगेट 1000 बच्चे हैं टोटल। टोटल 1000 बच्चे हैं आपका टारगेट। तो अभी आप किस टारगेट पर हैं? हम 10,000 बच्चे लेंगे तो उसमें से वो 1000 निकलेंगे जो हमारे साथ एंड तक मैच जी। अब तक कितने बच्चे आ चुके हैं? 300 हैं। 300 हैं। तो नंबर्स आर वेरी लो। राइट? लेकिन कुछ भी नहीं पता था ना कि करना क्या है। ओ डेफिनेटली। और अभी अभी अर्ली स्टेजेस भी है। अभी तो हम खुद सीख रहे हैं। सीख रहे हैं। बिल्कुल। मेरा ये ख्याल है कि साल के अंत तक 3000 हो जाएंगे। 3000 हो जाएंगे इंशा्लाह। 10 एक्स के जाएंगे। आई मीन नाव आई मीन इंशा्लाह तो अगर इनमें कुछ बच्चे ऐसे हैं जिनकी इंटेंसेस अच्छी साल 20 से वाओ तो मुझे ये बताएं कि इनमें से फर्ज करें कि इनमें से कुछ बच्चे ऐसे हैं जिनकी इंटेंसेस अच्छी है बट दे डोंट हैव द मीन्स उनके पास मसाइल ₹100 का है ₹100 का लैपटॉप है मोबाइल ₹10 का है ठीक है मेरा नहीं ख्याल कि कोई भी पाकिस्तान में अगर किसी की टांग टूट जाएगी तो फिर ₹00 कोई नहीं मिलेगा उसको चल तो अगर यहां पर आप कोई अगर आपको कोई फंडिंग या फंडिंग सोर्स या स्कॉलरशिप के बारे में आपने सोचा नहीं है इस बारे में? नहीं हम नहीं लेते। नहीं लेते जानबूझ के। ओके हां जानबूझ के लेते क्योंकि हमने शुरू में लैपटॉप दिए ना। हमने एक और प्रोग्राम भी शुरू किया हुआ है। उसके लिए शायद मैं फंडिंग लूंगा वो है वन लैपटॉप फॉर पाकिस्तान। मैं समझता हूं लैपटॉप मिलने के बाद इंसान की जिंदगी चेंज हो जाती है। जैसे आपकी चेंज होगी 12 साल की उम्र में। तो मैं चाहता हूं कि हम ₹1000 लें और लैपटॉप ₹1500 ले और लैपटॉप दे दें। $5 लें महीना और लैपटॉप दे दे। और उसकी वारंटी होगी। एक साल तक खराब हो जाए ले आओ दूसरा ले आओ और ये दिस इज़ व्हाट आई हैव स्टार्टेड टू डू और मैंने दिए हैं उसकी टीम भी बन रही है अभी तक मेरे पास टीम तीन दफा बन के टूट चुकी है अच्छा तो वंस आई हैव द प्रॉपर टीम आई हैव द फंडिंग फॉर इट मैंने अपनी जेब से पैसे लगा के अब तक मैं 2000 लैपटॉप इस तरह से दे चुका हूं अच्छा 27000 लैपटॉप की रिक्वायरमेंट आई थी मैंने एक एक वीडियो लगाई 27000 लोगों ने अप्लाई कर दिया कि हमसे ले लो000 ले लो तो डिमांड तो देखिए है बस मेरा ये होता है कि इसमें इसमें से ऐसा ना हो कि आपके जो रिहान एआई स्कूल जो है इसके अंदर खासकर मुस्तहिक बच्चे जो बच्चे करना चाहते हैं वो पीछे रह जाए। मुस्तहिक सब है सब हम सबकी हेल्प नहीं कर सकते। वी नीड टू अंडरस्टैंड का कॉल है ना कि भ आपकी किस्मत में और कोशिश में क्या फर्क तो भ किस्मत ये है कि भ आप खड़े हो जाए खड़े हो जाए। एक टांग उठा ले एक टांग उठा। दूसरी टांग उठा दूसरी टांग उठा। तो जो हम कर सकते हैं वो कर रहे हैं और जो नहीं कर सकते उसके लिए बेहतर ये है कि हम अपना सर में दर्द करने के बजाय हमने हर चीज ओपन सोर्स की हुई है ना अगर कल कोई छोटा स्कूल कहता है कि जी हमें करना है आप कर लें आप भी कर लें आप भी कर लें जो हेल्प चाहिए आप हमको बताएं हमारी किताबें अवेलेबल है हमारे टीचर्स ट्रेनिंग अवेलेबल है आप अगर किताबें उठाएं तो मैं बिल्कुल सो हमारी दो साल की जो मेहनत है वो ये किताब निकली है इसको हमने ने बनाया है कि जो कुछ हम साल में पढ़ाते हैं उसको उस समझो कि टरेनॉल 1000 मिलीग्राम की जगह ये टायरेनॉल 200 ग्राम है और इसको अब एडमिशन का क्राइटेरिया ये है कि पहले ये किताब पूरी करो इसमें टास्कें हैं वो पूरी करो उसमें तुम्हें छ महीने से लेके एक महीना लग सकता है टास्कें पूरी करो एडमिशन ले लो बगैर इसके हम एडमिशन नहीं देते और ये हमने ग्लोबली पढ़ा रहे हैं हम मैं अमेरिका में भी स्कूल खोलना चाहता हूं फिजिकली भी खोलना चाहता हूं ऑनलाइन तो खुला हुआ है जहां पर बच्चे इसको करके बड़े भी इस वक्त हमारे पास 20 बड़े पढ़ रहे हैं। हमारे पास एक और हमारी ख्वाहिश है कि हम 65 प्लस का स्कूल बनाएं। जैसे आपके वाले 80 के हैं ना हमारे ओल्डेस्ट स्टूडेंट यहां पे डॉक्टर बरकत सरानी है। बहुत मशहूर आदमी है इलाके के। 84 के हैं। वो रोज आके क्लास पढ़ते हैं। यही पढ़ रहे हैं। और उनके लिए एक थोड़ा सा ट्वीट किया कि और आसान किया है कि भ ज़ूम पढ़ लो या फोटो कैसे सर्च करना है अपने मोबाइल में। मोबाइल चलाना ही नहीं आ रहा ना। बड़ी उम्र के लोगों को। तो एव्री फिफ्थ पर्सन इन अमेरिका इज ओवर 65 तो वो ह्यूज ह्यूज अपॉर्चुनिटी है। फिर ये हमारे टीचर ट्रेनिंग का बूट कैंप है। वो टनॉल 200 ग्राम थी। ये 20 ग्राम है। अच्छा ये और हल्का किया है कि टीचर बहुत ज्यादा इगोस्टिक होते हैं। वो पढ़ना ही नहीं चाहते। यस। वो कहते हैं हमें तो हम तो टीचर हैं। 20 साल से हमें क्या पढ़ाओगे? हम कहते हैं अच्छा भाई माफ़ कर दो। ये एक घंटा रोज दे दो महीने ताकि तुम्हें कंप्यूटिंग आ जाए। एआई आ जाए। कल मैं एक स्कूल में था शिकागो में। में वो टीचर उछल रही थी बकायदा एक्साइटमेंट से कि इतना अच्छा स्कूल है। तो मैंने उनसे कहा कि आप फिर सोशल मीडिया की आईडी है तो कहती है ही नहीं मैं तो बनाऊंगी भी नहीं कोई तो हम चीजों को बगैर इस्तेमाल करे कैसे आगे लेके जाए क्योंकि जो टूल्स हैं आज के जमाने के आप Lindin पे है ही नहीं तो आपको कोई कैसे टाइम देगा आप कैसे अपने आपको बड़ा करेंगे? देयर आर सर्टेन टूल्स यू नीड टू ग्रो तो वो टूल्स इसमें हम सिखा रहे हैं। फिर ये हमारी बेसिक स्कूल की किताब उसकी पांच चार किताबें इस तरह की पहले चार यह लेवल वन यह लेवल वन है हमारा अब तक सिर्फ तीन स्टूडेंट्स ने ये किताब मैंने जो पूरा लेवल वन है वो क्रॉस किया है 300 में से हम हम वै नाइस आई कैन सी इसके अंदर जो मटेरियल और ग्रेडिंग सिस्टम भी नहीं है ज्यादा दिस आर जस्ट टास्क बेस्ड एस लॉन्ग एज यू आर सेटिस्फाइड विथ द टास्क प्लीज परफॉर्म द टास्क हां बिल्कुल और फिर ये हमने कोडिंग डाली है अब कोडिंग में सबसे बड़ा प्रॉब्लम ये था कि कोडिंग की तो वही बकायदा आपको पथन पीएपी ये सब सीखना था। हम कह रहे हैं भाड़ में गई। जैसे जसन ने लास्ट ईयर बोला कि जी को खुदा के वास्ते नहीं सीखनी कोडिंग तो तुम्हें एआई करके दिखी तो हम वो एआई से कोडिंग यहां करा रहे हैं और ये पांचवी का बच्चा ये कोडिंग कर रहा है। क्या कर रहा है? कैलकुलेटर बना रहा है। कैलेंडर बना रहा है। छोटे-छोटे सॉफ्टवेयर बना रहा है। क्योंकि आप खुद कोडर हैं। तो आप देखें बिल्कुल सिंपल टास्क है। लेकिन पांचवी के बच्चे से हम पब्लिश करा रहे हैं कि तुम्हारे प्रोडक्ट चलना चाहिए। फिर अगली किताब उठाएं और उसको देखें। यह वो कोडिंग है जो हमने अपनी बैचलर्स की फ्रेश वन ईयर में पढ़ी होंगी कि टिकट गेम बना लिया या कोई कोई बुलियन बनाना मुसीबत था बिल्कुल अब जो है वो आसान हो गया अब इसको खोल के जरा देखें ये एक महीने की है बिल्कुल ये सेकंड महीने ये शुरू हो जाती है अब देखें क्या बनवा रहे हैं हम सेकंड महीने में टास्क वन क्या है 12 साल का बच्चा है ठीक है चाहे जीबीटी का क्लोन बना रहा है एपीआई यूज़ करके अगला ताज देखिए क्या WhatsApp बना रहा है व ठीक है 22 कितने बिलियन 19 बिलियन डॉलर की कंपनी की क्लोन बनवा रहे हैं हम तीन तो आपके पास लोग हैं जिन्होंने ये टास्क कंप्लीट किए हैं जी और उनके उनके प्रोडक्ट्स हां बच्चे और उनके और उनके प्रोडक्ट जो है वो अवेलेबल है पहले बच्चे नहीं मैं तो नहीं एवरीवन हैज़ टू पब्लिश ऑनलाइन ऑनलाइन हां एंड इट हैज़ टू वर्क अदरवाइज वो अगले टास्क में नहीं जा सकता। वी हेल्प देम फिनिश इट। वाओ दिस इज अमेजिंग। दिस इज टू अमेजिंग। तो मैं उछल आप भी नहीं कर सकते। मैं भी नहीं कर सकता जब तक ये किताब ना हो। हां। वजह उसकी क्या है कि ये टूल्स पहले थे ही नहीं। असल में हमारे पास अब टूल्स जो है वो टूल्स को कोडर इस्तेमाल करने को तैयार नहीं है। तैयार नहीं है। तो हम बच्चों से वो कोडिंग करवा रहे हैं जो बड़े भी करने को तैयार नहीं। हम आई मीन दे आर लर्निंग टू हाउ टू गेट टू गेट हब एंड देन गेट हब से डॉक्यूमेंट्स डाउनलोड करना इंस्ट्रश डाउनलोड दे डोंट अंडरस्टैंड आई मीन दीज़ आर वै बेसिक एटिक्स ऑफ़ बीइंग अ प्रोग्रामर आई डोंट केयर इफ दे अंडरस्टैंड और नॉट मैं जानता हूं कि ऐसे भी बच्चे हैं जो अपनी बैचलर्स कंप्यूटर साइंस में कर लेते हैं। उनमें से किसी ने भी कुछ नहीं बनाया होगा। उनके पास इन ये लोन बना के नहीं दे सकता। दूर की बात उनके पास गेटअप का अकाउंट नहीं होगा। तो हम इस सब से करवा रहे हैं और दिस इज इनसेन जिस दिन यह पहली दफा मुझे WhatsApp बंदे ने बच्चे ने बना के दिखाया ना मैं उछल रहा था। मैं बता नहीं सकता कि मैं मेरी शक्ल कैसी हो गई थी कि यार ये तुम कैसे हो सकता है तुमने मना लिया। मुझे यकीन ही नहीं आ रहा। और फिर मैं हम बैठे बोर्ड पे हमने बैठ के क्योंकि मैं हर चीज ऑनलाइन करता हूं तो आई कैन गो एंड लुक कि हमने कहा कि अब हर पॉपुलर वेबसाइट जो इंटरनेट पे है अब उसकी कॉपी बनाओ सर। Facebook की कॉपी उस पे 10 यूजर भी बनाने हैं 10 फ्रेंड भी होने चाहिए Lindin की कॉपी उसप 10 यूजर भी होने चाहिए। हॉट जॉब्स की कॉपी इंडीड की कॉपी मॉन्सर की कॉपी पोर्टल डॉट जो जस्ट प्रैक्टिस एक्सरसाइज फॉर देम टू एक्चुअली लर्न नो नॉट टू कोट थिंक क्या है उनके दिमाग से डर निकालना कि तुम WhatsApp बनाना बच्चों के लिए हम ये काम करना ये तो ये तो मैं कर चुका हूं। ये तो मैंने फिफ्थ क्लास में किया था। है ना? तो वो लेवल आप बच्चे का सोचिए ना कि जो यह बच्चा करके आपके पास आकर बैठेगा वो क्या कर सकेगा। दैट इज ट्रू। आई थिंक द थिंग दैट वी हैव डिस्कस इन द पास्ट फ्यू आवर्स टुगेदर इसके आपके और मेरे दरमियान जो एक चीज कॉमन थी वी वर नेवर अफ्रेड टू एक्सप्लोर समथिंग न्यू। एंड ऑल द किड्स आर अफ्रेड टू एक्सप्लोर बिकॉज़ टीचर्स आर अफ्रेड। टीचर्स एंड द टीचर्स आर द बिगेस्ट चैलेंज बिकॉज़ वी लर्न फ्रॉम आवर टीचिंग। एंड द टीचर्स आर टॉट टू बी स्केर्ड। आज भी टीचर लोकल सर्वर बनाता है। 127.0.0 पे कोड डलवाता है। सर्वर क्रिएट करवाता है। अरे भाई जमाना चेंज हो चुका है। क्या कर रहे हो आप मेरे बच्चों के साथ? वो उसी में निकल जाता है। मैं कहता हूं नहीं आप Chrome बुक पे बनाएंगे बैठ के। Chrome बुक पे तो हो ही नहीं सकता। भाई जो हम करके दिखाएंगे। हमारी एक स्टूडेंट जो 9 साल की है उसको एफटीपी का सॉफ्टवेयर नहीं मिलके दे रहा था। उसने अपना एफटीपी का वेब एफटीपी का सॉफ्टवेयर लिख डाला। अब मुझे तो यकीन ही नहीं आया कि यह बच्ची ने खुद से सोचा होगा और क्या होगा? मैंने उससे गप्पे लगाए तो मैंने सर पकड़ लिया अपना कि यार उसने कहा सर मुझे मिल ही नहीं रहा था कि मैं मुझे सॉफ्टवेयर कोई बता नहीं रहा था। मैं गई चैट इस पे क्लॉट पे और मैंने लिख लिया और चल भी गया वो और मैं अपनी कोड अब अपना हमने हर बच्चे को सर्वर दिया हुआ है। होस्टेड सर्वर खरीद के सब बच्चों को दिया हुआ है। यानी सर्वर बनाने की इजाजत मैं नहीं देता क्योंकि $5 का आता है। अब आप ये देखो ना जब McDonald $10 का मिल रहा हो तो आप कहो जी मैं अपना घर में बर्फ बनाऊंगा। बनाओ शौक से लेकिन स्केल नहीं हो सकता था। स्केल के लिए इनके दिमाग में जो वो जो मरे हुए कुत्ते पड़े हैं वो निकालने की जरूरत है। एंड दैट इज व्हाट वी आर डूइंग। आई ट्राइड द सेम विथ माय एडल्ट टीम दे रिफ्यूज्ड। जो हमारा जो टॉप बच्चा है जो सब चीजें बना लेता है जो बोलो बना देता है उसको कुछ समझ नहीं आती लेकिन वो जो बोलो बना देता है अभी हम ल्च कर रहे हैं नई प्रोडक्ट जिन बाबाnट साइट है उस पे के हम जितनी भी एआई के टूल्स है ना वो जिन बाबा बता दें लाइक अ जिन तो अब Facebook सारी लाइव वीडियोस बंद कर रहा है कि जी जितनी भी है आप डाउनलोड कर लें टूल जो है वो $20 महीने का है रीपर्पस पे वो 360 की क्वालिटी डाउनलोड करता है। अच्छा इसको मैंने कहा कि बना दो घंटे बाद बना के दे दिया। मैंने कहा क्वालिटी क्या कहता है सर? श्री 360 मैंने कहा नॉट एक्सेप्टेबल दोबारा बनाओ। 720p पे चाहिए मुझे। अगले दिन आए सर हो गया। कैसे किया सर? पता नहीं। मैंने तो एआई को बोला था। मुझे ये पता करना जरूरी है कि कैसे किया। या ये पता होना जरूरी है कि मैंने कर लिया। तो दीज़ आर टू वेरी फंडामेंटल। किसी को तो साइंटिस्ट बनना है। जाओ कोडिंग करो, सीखो, असेंबली सीखो जो सब सीख रहे हैं। बट मेजॉरिटी को नहीं मालूम कि आपका फ़ कैसे चलता है। मेजॉरिटी को नहीं मालूम आपकी गाड़ी कैसे चलती है। मेजॉरिटी को नहीं मालूम बिजली का बटन ऑन ऑफ करने से बिजली कैसे आती है। मेजॉरिटी डजंट नीड टू अंडरस्टैंड ऑल दैट। एंड दैट इज़ वेयर आई एम ट्राइंग टू रीथिंक एवरीथिंग वेयर मेजॉरिटी को क्या चाहिए? मेजोरिटी मेजर अभी विनोद खोसला का परसों मैं पडकास्ट सुन रहा था जो सन माइक्रो सिस्टम का फाउंडर है। कहता है कि इन नेक्स्ट थ्री इयर्स वी विल सी ऑलमोस्ट 2 बिलियन पीपल राइट देर ओन सॉफ्टवेयर जस्ट लाइक एवरीबडी नोस हाउ टू टाइप बिफोर यू नो 25 इयर्स एगो टाइपिंग वाज़ ओ टाइपिंग इंस्टट्यूट जा रहे हैं लर्निंग सो नाउ मोबाइल आया उसने कहा कि अब जो वाइब कोडिंग है वो तो आपने बोलना है थोड़ा बना दो वो बना सो चेंज करने के वो चेंज कर देते हैं तो इस अब अब आपके जो प्रोग्रामर आ रहे हैं ना वो सारा जंक अपने खोपड़े से लेकर आ रहा है। हर चीज सोचे जा रहे हैं। हर चीर सोचे जा रहे हैं। हर चीज सोचे जा रहे। सोचने में इतना टाइम लगा रहे हैं। जबकि वो भूल गए कि उनके पास जिन है। आपने तो जिन को बोलना है और जिन को अब हम क्या करते हैं? अलादीन का चिराग भी देते हैं ना कि यार इससे जो मांगना है मांगो। वो क्या कहते हैं यार दो बिरयानी की प्लेट ले आओ। हम उसको ये नहीं कहते कि मुझे दुनिया के हर शहर में एक बिरयानी की अपनी दुकान चाहिए। हमें ये सोचना नहीं आता कि हम इतना बड़ा सोच सके। एंड माय जॉब टू मेक दोज़ लीडर्स बाय डिफॉल्ट। सो दे फर्स्ट थिंग हैव टू लर्न इज थिंक बिग मिलियन लोगों के लिए सोचो 10 मिलियन के लिए सोचो 1 बिलियन के लिए सोचो। 1 बिलियन पे जाके तुम सोचो ना कॉस्टिंग क्या होगी? विनोद कोसला की उसमें था कि अगर इंडिया 2 बिलियन डॉलर इन्वेस्ट कर दे तो एक सेंट पर बंदे के हिसाब से डॉक्टर मिल जाएगा। एआई के ऊपर राइट। आपको डॉक्टर की क्या जरूरत है? आप यही से आधा डायग्नोस तो यही कर देती। बिल्कुल। तो ये वो थिंकिंग मॉडल्स हैं जो मेजॉरिटी आर अनएबल टू कॉम्प्रिहेंड एंड थिंक। बिकॉज़ हमने बंदे को मार मार के उसको छोटा थिंकर नहीं हो ही नहीं सकता। हो ही नहीं सकता। हो ही नहीं सकता। बच्चा एयर होस्टेस को मैं बताने लगा अपनी यहां पे। कि मेरा स्कूल में ना यह होता है। हु विल बाय अ मिलियन डॉलर बिज़नेस फ्रॉम एन 18 ईयर ओल्डर। आई सेड वेल वेट फॉर इयर्स एंड देन यू विल रीड इन द न्यूज़। दैट इज करेक्ट। जब मेरी अपनी एआई की जो जुस्तजू है वो स्टार्ट इसी से हुई थी कि आई वास जस्ट ब्राउजिंग ओवर अ वीकेंड ऑन YouTube। पता नहीं कहां से लिखा है कि वाच 13 ईयर ओल्ड डू एआई। मैंने उसको प्ले किया तो एक 13 साल का बच्चा था। उसने लाइव 45 मिनट की वीडियो में उसने पूरी स्क्रैच से लेकर एंड तक प्रोग्रामिंग की। एंड बेसिकली एआई मॉडलिंग की। मशीन लर्निंग की उसके अंदर और मशीन लर्निंग के एंड रिजल्ट यह था कि द मशीन वास एबल टू विद जस्ट 50% ऑफ द डाटा दैट इज अवेलेबल इन द डाटाबेस एंड द रेस्ट द 50% उसने खुद मशीन ने रीड किया विद 98 आई मीन ऑलमोस्ट 99% एक्यूरेसी से उसने कैंसर की लैब्स रिपोर्ट्स पढ़ के कैंसर पेशेंट्स को डायग्नोस किया व्हिच इज अमेजिंग राइट बिकॉज़ अगर एक डॉक्टर है उसके पास 500 पेशेंट्स हैं। उसके बाद टाइम सिर्फ 200 के लिए है। तो यह रिपोर्ट एआई को बता सकता है कि यार यू शुड कंसंट्रेट ऑन दिस 90% और दिस 10% एंड द अदर्स यू कैन प्रोबेब्ली रेफर टू समबडी विद अ लोअर स्पेशलिटी और समथिंग और मे बी एटलीस्ट प्रायोरिटी लिस्ट में नीचे कर लो क्योंकि चांसेस आर दे डोंट हैव कैंसर। सो एटलीस्ट वो है और बड़ी-बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व होती है इससे। तो जब मैंने वो देखा तो मुझे था कि फिट हो मुझे नहीं आता था ये करना। थिंकिंग का प्रॉब्लम है। सो द बेस्ट चैलेंज नाउ एंड जो हमें आईडिया आईडिया डेवलपर्स आईडिया भी देती है। बिल्कुल। सो वी आर वी डोंट वी डोंट नो हाउ टू थिंक विद आई। वी डोंट नो हाउ टू लिव कम्युनिकेट कम्युनिकेट लिव विद। हम छोटा सोचते हैं तो हम मैंने कहा ना बिरयानी की दो प्लेटें मंगा लेते हैं जिन से भी। हालांकि हमें कहा जिन है। मेरे मेरे खुद जस्ट लेट यू गाइस नो। मेरे खुद के एआई के चाहे जीपीटी के चार अकाउंट है। क्यों? एक पे थक जाता है वो। तो दूसरे पे खैर वो भी स्मार्ट होना शुरू हो गए हैं वैसे। लेकिन डेफिनेटली आई कई कई कई कई कई कई कई कई कई कैन यूज़ वीपीए टू यू नो काइंड मेक सम ऑफ़ द स्टफ प्लस को पायलट के अंदर भी है और दूसरे आई इंज भी हैं। आई कैन स्पीक इंग्लिश वैरी फ्लूटली। एंड ट्रस्ट मी आई डू नॉट हैव एक्सेस इदर। बट नॉट अ डे गोज़ बाय दैट आई राइट माय ईमेल्स विद ए आई। आज सुबह भी आई गॉट सम ईमेल्स फ्रॉम सम न्यू प्रोस्पेक्टिव क्लाइंट्स आई रोट अप द होल ईमेल देन आई आस्क एआई टू फिक्स इट अप फॉर मी देन आई राइड इट अगेन एंड सेड ओके श्योर कुछ अरसे में मैं उसको कह दूंगा उसको पता होगा कि मेरा मिजाज और मेरा मूड क्या है जो जो चेंजेस कर रहा हूं वो ट्रैक कर रहा है दैट्स मशीन लर्निंग मैं आई एम वन ऑफ़ द अर्ली अडप्टर्स ऑफ ईवीज ईवीस बट नॉट बिकॉज़ दे आर ईवीज क्योंकि जब ईवीज आई थी तो उस वक्त फैसला नहीं था उस वक्त Nissan लीव थी। दूसरी गाड़ियां थी और Tesla का अर्लियर मॉडल था। उसमें ऑटो पायलट नहीं था। दैट नेवर फैसनेटेड मी। यह भी क्या है? इंजन निकाल के बिल्डिंग का लगा दिया मोटर। कोई बिल्ली नहीं है मेरे लिए। लेकिन जब मैंने देखा कि एफएसडी आ रहा है। दैट वाज़ माय इंट्रीगनेस। मेरी फैमिली बड़ी नाराज थी शुरू में कि व्हाई डीड यू व्हाई डीड यू सपोर्ट दिस सो मच? व्हाई डू यू ट्रस्ट इट सो मच मोर देन अदर्स? लाइक मेरी बीवी कहती है आपको मेरी ड्राइविंग से ज्यादा इसकी ड्राइविंग पर ऐतबार है। मैंने कहा उसने मिलियंस ऑफ़ माइल्स चलाई है। आपने चलाई उसकी उसकी 12 आंखें हैं। तुम्हारी दो हैं। उसका सिक्स सेंस तुमसे कहीं ज्यादा है। उसका एट सेंस है। तो एट द एंड ऑफ़ द डे वन थिंग आई हैव रियलाइज्ड इज़ कि अगर आप टेक्नोलॉजी को चांस नहीं देंगे टेक्नोलॉजी आपको चांस नहीं देगी। मैं मेरी एफएसडी ड्राइव करने का मकसद लेजीनेस नहीं है। मेरी एफएसडी का है कि जितना मैं कंट्रीब्यूट कर रहा हूं एटलीस्ट आई कैन से यू नो व्हाट ऑफ ऑल द माइल्स आई हैव ड्रिवन ऑन माय एफएसडी व्हीकल एटलीस्ट आई कैन गेट अप इन एंड से ऑल द एफएसडी ओनर्स मैं बहुत से एफएसडी ओनर्स को जानता हूं जो एफएसडी इस्तेमाल भी नहीं करते हैं और मेरी गाड़ी जब तक कि खुद ड्राइवे में पुल नहीं हुआ मैं उसको छूता नहीं हूं कभी नाराज होती है। कभी स्टीयरिंग यूं जा रहा है कभी यूं जा रहा है और बच्चे भी कह रहे हैं कि व्हाट्स हैप्पेनिंग? व्हाट्स हैप्पेनिंग? मैं कहा लेट फिगर आउट। प्लेट फिगर इट आउट नहीं करेगी। आई विल डू इट बिकॉज़ आई एम वेरी श्योर इन अ मंथ और सो कर दिस कोड विल बी फिक्स्ड एंड आई हैव सीन इट एक्चुअली के मैंने ड्राइव की है। रूट रोंग हुआ है। मैंने इसको लास्ट मिनट तक फेल होने दिया है। फिर मैंने सही किया है। एंड विद इन अ मंथ और सो सम अपडेट केम इन एंड नेक्स्ट टाइम वो टर्न बिल्कुल सही हो रहा था। एंड आई फ्ट लाइक आई थिंक आई कंट्रीब्यूटेड टू इट बिकॉज़ तो इसीलिए मैं भी यही कहूंगा आपके बच्चों को भी। जिनको एफएसडी नहीं मालूम उनको बता दे। एफएसडी इज़ फुल सेल्फ ड्राइविंग राइट? तो Tesla सेल्स इट एज अ फुल सेल्फ ड्राइविंग व्हीकल। तो मेरा यह है कि यू गिव इट अ फुल चांस वेब यू कैन। तो इसी तरह बच्चों को भी और एडल्ट्स को भी ये कहूंगा कि न्यू लर्निंग के लिए कभी भी शाय ना हो। उसकी वजह ये है कि अगर आपने उसको चांस नहीं दिया तो अन करीब वो आपको चांस नहीं देगा। एंड यू विल फील लेफ्ट बिहाइंड। और खासकर पाकिस्तान के लिए मैं कहूंगा कि ये हुआ है। इंडिया में भी काफी ज्यादा। लेकिन आई थिंक इंडिया हैज़ बीन फाइटिंग इट एटलीस्ट। वहां पर कम से कम एक तरीके से फाइट हो रहा है कि हम फाइट करेंगे। कुछ ना कुछ करना है हमने इस बारे में। 100% प्रॉब्लम कहीं सॉल्व नहीं होती। 100% लिटरसी रेट यूएस के अंदर भी नहीं है। लेकिन फाइट तो कर रहे हैं ना। तो पाकिस्तान में जो है मैं समझता हूं कि जस्ट लाइक इंडिया है और मैं कहता हूं बल्कि अब तो अपकमिंग बांग्लादेश भी वहां है। मैं गया था बांग्लादेश 2016 में एक दिन के लिए। एंड मैं वापस कराची आया वहां से और मैंने अपने दोस्तों को कहा कि ट्रस्ट मी दिस नेशन इज गोइंग। और आप देख रहे हैं हमारे सामने 2016 मैंने पहली मर्तबा गया था बांग्लादेश एक दिन के लिए। तो मैंने ये देखा कि बच्चे जब स्कूल बच्चे जब स्कूलिंग स्कूलिंग जो है ना उस पर अपनी तवज्जो जो है खासकर नई टेक्नोलॉजी पर देते हैं और चैलेंज करते हैं अपने को तो आगे निकलते हैं। एक बहुत मशहूर कहावत है मार्क 20 की कि आई डोंट लेट माय स्कूलिंग इंटरफेयर विद माय एजुकेशन और मैं समझता हूं कि रिहान एआई का जो आपने कांसेप्ट इंट्रोड्यूस किया है बल्कि रिहान स्कूल का भी यही था लेकिन उसमें फिर भी थोड़ा फॉर्मेट आपका ट्रेडिशनल था। तो अब जो आप लेकर आ रहे हैं ना यह डायरेक्टली मार्क को कॉम्प्लीमेंट करता है मेरे ख्याल से क्योंकि यू आर नॉट अलाउंग दी स्टूडेंट्स टू लेट स्कूलिंग इंटरफेयर वि देयर एजुकेशन एंड आई थिंक एजुकेशन इज दी एंड गेम वी ऑल आर मार्चिंग टुवर्ड्स नॉट स्कूलिंग स्कूलिंग इज जस्ट मीन्स है हाउ डू यू गेट देयर इट्स डिफरेंट तो इवन दो आपका रिहान एआई स्कूल कहलाता है लेकिन आई थिंक इट्स अ लिटल बिट मोर देन जस्ट स्कूल वहां जो स्कूलिंग की टेक्निक्स जहां तक आपने मुझे दिखाई है और समझाई है डेफिनेटली ली नेक्स्ट टाइम अगर पाकिस्तान आऊंगा तो डेफिनेटली आई विल विजिट यू फॉर शोर बट इट्स इंट्रगिंग बिकॉज़ हमारे पास वक्त वाकई में बहुत कम है और हम डिसाइड नहीं कर सकते। मेरे साथ जितने लोग काम करते हैं मुझे जब पता लगता है कि वो एआई इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं या उनकी जो पावर पॉइंट थी ऐसी है वैसी है तो मैंने उनको जब फोर्स किया तो ऑब्वियसली एडल्ट्स हैं सारे 30ज में है 40ज में है तो जब उनको दिया तो उनको अंदाजा हो गया तो मैंने कहा कि एआई तुम्हें रिप्लेस नहीं कर रहा है एआई तुम्हें इनेबल कर रहा है हां अगर तुम उसकी इनेबलमेंट एक्सेप्ट नहीं करोगे तो इट विल इवेंचुअली रिप्लेस यू एंड दैट्स एक्जेक्टली वेयर वी आर टुडे तो डेफिनेटली आई विश यू ऑल द बेस्ट विथ दिस वेंचर आई मीन आई वुड लव टू डू अ लिटल बिट मोर देन दिस विल डेफिनेटली टॉक ऑफलाइन एस वेल के हम स्टूडेंट्स द स्टूडेंट्स अपने बच्चों को दें उनको ट्राई कराएं खुद ट्राई करें बेगम को ट्राई कराएं बिकॉज़ इट्स एन एक्सपीरियंशियल थिंग जस्ट लाइक एफएसडी इतना एक एक्सपीरियंस है हफ्ता ट्राई करें वी हैव टू डाइव एंड नीडी टू ट्राई इट आउट एंड देन सी इफ इट समथिंग यू वांट टू बिकॉज़ वी आर ट्राइंग समथिंग वैरी डिफरेंट मैं ऑस्टन में दो बहुत अच्छे स्कूल इन्वेंट हुए एक का नाम है अल्फा वो $00 साल का लेते हैं और वो भी वो उस टक्कर का नहीं है। मैं समझता हूं जो हम दे रहे हैं। अच्छा और सेकंड है एक्टिन एकेडमी वो 12 साल से चल रहा है। जो पहला वाला है वो भी 10 साल से वो एक खातून है वो चला रही हैं। और उसमें अब उन्होंने एआई इंट्रोड्यूस किया है। एंड एक्टन के अंदर भी सिमिलर है। हमारा मॉडल है जो बट जो जो प्राइमरी डिफरेंस है ना कि ये दोनों स्कूल भी स्कोर्स के पीछे भाग रहे हैं। और मैं कह रहा हूं स्कूल्स आर ऑब्सोललीट एंड ही इज़ अ गुड न्यूज़। एनी बच्चा जो हमारे पास से हमारे तीन टारगेट्स अचीव कर लेता है जो हम उसको पूरा कराने में पूरी मदद करेंगे। हमने अभी एक एमओयू साइन किया है कि ही कैन नाउ अप्लाई फॉर एनी आईवी लीग स्कूल ही वांट्स एंड ही विल गेट अ स्कॉलरशिप। वि इज अमेरिका का जो स्टैनफोर्ड हार्व एमआईटी है उसमें उसको एडमिशन वो कंपनी दिलाने में उसकी मदद करेगी और फुल स्कॉलरशिप के साथ व्हिच मींस कि जो इनका दिमाग में था ना कि हमारा डिग्री का क्या होगा क्या होगा तो एक तो ये कि हम अमेरिकन हाई स्कूल जीडी करा के देते हैं। बिल्कुल और उसके बाद हम उनको जंप लेके जा रहे हैं कि अब आप जिस अमेरिकन यूनिवर्सिटी में आईबी लीग यूनिवर्सिटी में जाना चाहें। परफेक्ट बिकॉज़ टेक्निकल यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी की रिक्वायरमेंट आपने जीडी से तो पूरी कर दी। हम जहां तक आईवी लीग या किसी अच्छी यूनिवर्सिटी की बात आती है तो फिर वहां इट ऑल बिकम्स योर स्कोर और योर टेस्ट स्कोर्स और योर अगर कोई अच्छा बॉलर्स हां अगर कोई अच्छा बॉल प्लेयर होता है तो जैसे मलाला है उसको तो कॉम्प्लीमेंट्री पासपोर्ट मिलता है ना भाई हमारे मुल्क में रह जाओगे तुम्हारे तो इसी तरह से अगर कोई बच्चा इतना हाई अचीवर है तो उसको यूनिवर्सिटी इज़ प्राउड टू हैव प्राउड टू हैव उनके लिए तो ब्रैगिंग राइट्स मिल जाते हैं कि देखो हमारे बच्चा तो मिलियन डॉलर के एग्जिट कर चुका करे हम सो इट्स एन इंटरेस्टिंग मॉडल। आई विल कीप ऑन ट्राइंग इंटिंग। बट आपकी हेल्प चाहिए होगी। हमें स्टूडेंट्स चाहिए। अमेरिका से इसलिए चाहिए क्योंकि हम इन बच्चों को यहां वाले बच्चों को वहां वाले बच्चों से इंटरेक्शन कराना चाहते हैं। वहां वाले बच्चे हमें वहीं की सोच लेके फिरते हैं। और यहां वाला बच्चा और वो वाला जब दोस्त बनेगा ना तब वो एक्चुअल लर्निंग प्लेस होती है। हमारे स्कूल में टीचर्स हैं ही नहीं। हम एवरीथिंग इज डन बाय द स्टूडेंट्स। सो हमारे पास शारपर ऑन्स या फैसिलिटेटर्स हैं और प्रिंसिपल से ले नीचे तक हर काम स्टूडेंट ने खुद करना है। करना है। तो हम स्टूडेंट को ट्रेन करते हैं और फिर स्टूडेंट सारा कुछ करता है। क्योंकि जो जैसे जैसे मैंने आपको बताया हम कि टीचर की ट्रेनिंग सबसे हल्की है। और जो स्टूडेंट ट्रेनिंग है वो सबसे भारी है। ये 1000 मिलीग्राम है। हम और ये 20 मिलीग्राम है। तो टीचर बेचारा कैसे पढ़ाएगा? क्योंकि उसके पास कैपेसिटी नहीं है तो हम इसलिए बच्चे के ऊपर ही फोकस करते हैं। बिल्कुल नहीं समझ सकता हूं मैं। समझ सकता हूं। थैंक यू फॉर योर टाइम। थैंक यू अगेन।